क्या पुरुष होने के कारण किसी की पीड़ा कम हो जाती है?
आज अनेक पुरुष और बालक अपनी समस्याओं, मानसिक तनाव, पारिवारिक संघर्ष, उत्पीड़न और कानूनी परेशानियों को चुपचाप सहने के लिए मजबूर हैं। उनकी आवाज़ सुनने, उनकी शिकायतों को समझने और उन्हें उचित सहायता देने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय संस्था की आवश्यकता है।
हम सरकार से **राष्ट्रीय पुरुष आयोग (पुरुष न्याय आयोग)** के गठन की मांग करते हैं, ताकि पुरुषों और बालकों को भी सम्मान, सुरक्षा और निष्पक्ष न्याय मिल सके।
यह मांग किसी के अधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि **न्याय को वास्तव में समान बनाने के लिए है।**
**न्याय लिंग देखकर नहीं, पीड़ा देखकर मिलना चाहिए।**